"हरियाली की सौगात"
(एक सच्ची प्रेरणा पर आधारित कहानी)
मैं पिछले 17 वर्षों से स्काउट और गाइड से जुड़ा हूं। इस सफर में कई यात्राएं की, कई सेवाएं दीं, लेकिन हाल ही में जो अनुभव हुआ, उसने दिल को सुकून दिया और आत्मा को सच्चा संतोष।
किस्सा शुरू होता है मेरी बहन के नए मकान से। एक दिन उन्होंने मुझे और मेरे भांजे को बुलाया। उन्होंने कहा,
"भैया, पीछे जो खाली जगह है ना, कुछ सूना-सूना सा लगता है। सोच रही हूं कुछ पौधे लगवा लूं, लेकिन समझ नहीं आ रहा क्या और कैसे करें।"
मैंने मुस्कराकर कहा,
"तो फिर चलो, इसे मिलकर एक छोटा-सा बग़ीचा बना देते हैं — सिर्फ पौधों का नहीं, खुशियों और हरियाली का।"
अगले ही दिन हम तीनों — मैं, मेरा भांजा और मेरी बहन — पास की नर्सरी पहुंचे। वहां सैकड़ों पौधे थे: कुछ फूलों से लदे, कुछ खुशबू से भरपूर, कुछ छांव देने वाले, और कुछ औषधीय गुणों वाले।
हमने एक-एक पौधे को देखा, समझा और चुना — सोचकर कि कौन कहाँ लगेगा, किसे कितनी धूप चाहिए, और किससे क्या लाभ होगा।
उस दिन हमने सिर्फ पौधे नहीं लगाए थे — हमने एक विचार रोपा था:
"हर कोई अपने घर को, अपनी छत को, अपनी बालकनी को एक छोटे से बग़ीचे में बदल सकता है। पर्यावरण बचाने के लिए हमें बड़े-बड़े काम नहीं करने, बस छोटे-छोटे कदम उठाने हैं।"
अब जब भी मैं उस घर जाता हूं, हर पौधा मुस्कराता है — जैसे कह रहा हो, "शुक्रिया, हमें जीने का मौका देने के लिए।"
सीख:
हमारे छोटे-छोटे प्रयास भी समाज और प्रकृति के लिए बड़े बदलाव ला सकते हैं। और सबसे अच्छी बात — ये शुरुआत हम अपने घर से कर सकते हैं।
करीब 22 पौधों को हमने चुना — जैसे गुलाब, चमेली, तुलसी, मोगरा, गिलोय, एलोवेरा, मनी प्लांट, और कई रंग-बिरंगे फूलों वाले पौधे। जब पौधे घर पहुंचे, तो जैसे घर में रौनक आ गई।
फिर शुरू हुआ असली काम — ज़मीन की सफाई, गड्ढे खोदना, खाद डालना, और पौधों को लगाना। हर पौधे को बहुत प्यार से उसकी जगह दी गई। ऐसा लगा जैसे हम एक-एक बच्चे को पालने का जिम्मा ले रहे हों।
काम खत्म हुआ तो सबके चेहरे पर थकान कम, मुस्कान ज़्यादा थी। मेरी बहन बोली,
"अब ये घर नहीं, जन्नत लग रहा है।"
और मेरा भांजा खुशी से बोला,
"मामा, अब मैं हर दिन इनसे बात करूंगा।"
यह कार्य उनिसेफ़ और भारत स्काउट और गाइड के समग्र सहयोग व प्रयास से प्रेरणा प्राप्त होने के बाद करने का अवसर म