मूक-बधिर बच्चों के बीच मनाया विजयंत स्काउट ग्रुप ने गणतंत्र दिवस.
26 जनवरी का इन्तजार पूरे विजयंत स्काउट ग्रुप को बड़ी शिद्दत से रहता है। हो भी क्यों नहीं, पिछले तीन वर्षों से हम सभी इन विशेष बच्चों के बीच बाल मेला आयोजित करते आ रहे है। जितनी ख़ुशी स्काउट परिवार को इन बच्चों के बीच होती है वह वर्णनातीत है।
इंदौर में स्कीम न. 71 में स्थित इस मूक बधिर विध्यालय में लगभग 500 बच्चे है। बहुत ही व्यवस्थित स्कूल है यह इन बच्चों के लिए। जब भी इस स्कूल में जाना होता है और बच्चों से मिलना होता है तो बच्चों को अपनी अपनी गतिविधियों में सक्रिय हिस्सेदारी करते देख मन प्रफुल्लित हो उठता है। इन बच्चों के मुखों पर किसी भी तरह की लाचारी या बेचारगी नहीं झलकती अपितु सामान्य बच्चों की तरह ये भी प्रसन्नचित्त नजर आते है। इस बेहतरीन वातावरण को उपलब्ध कराती आ रही है बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय उनका अपने बच्चों के समान ध्यान रखने वाली डॉ. उषा दीदी।अब तो उनके साथ उनकी बेटी मोनिका पंजाबी भी सक्रिय रूप से इन बच्चों की सेवा में तत्पर है।संस्था के अध्यक्ष आदरणीय मुरलीधर जी खंडेलवाल भी तन मन धन से बच्चों की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्पर रहते है। सलाम आप सभी एवं आपकी पूरी टीम को इस सेवा परायणता के लिए। विजयंत परिवार भी हमेशा आपके साथ है।
26 जनवरी के कार्यक्रम में इन बच्चों की सहभागिता देखने लायक होती है। ये बच्चे ड्रिल करते है, नृत्य करते है, साइन लेंग्वेज की मदद से भाषण देते और सुनते है, हाथ ऊपर कर उन्हें हिलाते हुए ताली बजाते हुए प्रसन्नता भी व्यक्त करते है।
इन बच्चों की बनायी हुई हैंडीक्राफ्ट और पेंटिंग देखकर तो दिल खुश हो जाता है।बिक्री के लिए रखी इन वस्तुओं को हम सब खरीदना अपना सौभाग्य समझते है।टीम विजयंत के हमारे कृष्णकांत जी मुजावदिया बताते है कि सर मैं तो पिछले दो वर्षो से किसी को भी कुछ भेंट देनी हो तो यहीं से खरीदकर देता हूँ।साधुवाद कृष्णकांत जी आपको।
हमें बताया गया कि सारे भारत वर्ष में एकमात्र यही मूक बधिर स्कूल है जहाँ 9th और 10th में Science सब्जेक्ट भी पढ़ाया जाता है। साइंस पड़ने वाले इन बच्चों की Science Exhibition देखने का मौका मिला, लाजवाब थी यह Exhibition... एक से बढ़कर एक प्रोजेक्ट बनाये थे बच्चों ने और बड़ी शिद्दत से उसे समझा रहे थे।साइन लेंग्वेज जानने वाले उनका ट्रांसलेशन कर हमें बता रहे थे।शाबाश बच्चों।
बच्चों के इस कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ उनका और हमारा चिरप्रतीक्षित "बाल मेला"
हमारी तैयारी थी, करीब 22 स्टाल पर विभिन्न तरह के गेम्स। और बच्चे शुरू हो गए।एक बच्चे को साइन लेंग्वेज में समझाने के बाद पूरी लाइन में फिर किसी को गेम समझाने की जरुरत नहीं पड़ती थी।सब होशियारी से खेलने लग जाते थे। हमारे स्काउट गाइड भी पूरे उत्साह से इन बच्चों को खिला रहे थे। वहीँ विजयंत परिवार के बाकी सदस्य भेल, पानी पतासे, गुड़िया के बॉल और बाकी स्टालों पर अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से निभा रहे थे।हमारे ही भूपेंद्र नीमा जी ने भी अपनी कोचिंग के बच्चों के साथ पाव भाजी और पापकार्न बच्चों को खिलाये।
आज हमारी विजयंत टीम के करीब 50 स्काउट गाइड रोवर रेंजर और वेंचर क्लब के 20 सदस्य पूरे सेवा भाव से बाल मेले को सफल बनाने में लगे हुए थे। लगभग 3.30 बजे जब हम सब घर लौट रहे थे तो इतने बच्चों की ख़ुशी महसूस कर हम सब भी बहुत खुश थे।
शहडोल से साइन लेंग्वेज सीखने आये 21 वर्षीय युवा साथी निशांत बेनर्जी जो इस संस्थान में गत 6 माह से साइन लेंग्वेज सीख रहे है , अपना कैरियर दुभाषिये के रूप में बनाना चाहते है .उनकी मदद से मैंने कुछ बच्चों से वार्तालाप करने में सफलता पाई। निशांत ने मुझे यह भी बताया कि सर ये बच्चे चाहे सुन और बोल न सके पर इशारो की इस साइन लेंग्वेज में ये बहुत जल्दी समझ जाते है और फिर किसी भी काम को बहुत परफेक्ट तरीके से करते है। मुझे इन सब के बीच काम करना बहुत अच्छा लग रहा है।
लखनऊ से इस संस्थान में 2006 से पढ़ रही मंसूरी अभी 10 वीं क्लास की पढ़ाई कर रही है।वो बोली मुझे हर वर्ष इस बाल मेले का इंतजार रहता है। मुझे बहुत पसंदआया इनामी कूपन और कार वाला गेम। आप सभी का शुक्रिया कि आप हमारे लिए इतने गेम्स लेकर आते है। हम आपके स्काउट बच्चों के साथ कंम्यूनिकेशन करना चाहते है पर यह डिफीकल्ट है क्योंकि वे हमारी और हम उनकी भाषा नहीं समझते।"
"इंदौर की वर्षा अभी अभी पावभाजी का टेस्ट लेकर आई जो उन्हें बहुत अच्छी लगी, बोलती है मैं भी 2009 से यहाँ पढ़ रही हूँ अभी 10 वीं में हूँ और जब तक सारे गेम्स नहीं खेल लूँगी घर नहीं जाउंगी।"
"नागदा की आयुषी जो 2009 से यहाँ है बहुत मुखर है।लगातार इशारो में बताती चली जाती है और निशांत उसकी भाषा समझ मेरे लिए लगातार कॉमेंट्री करता जाता है।इस संस्थान में आने के बाद ही मेरा जीवन खुशहाल हुआ इसके पहले मैं दुनिया से इतनी घुल मिल नहीं पाती थी।यहाँ की सब टीचर बहुत अच्छी है।सुबह 5 बजे से उठकर रात 10 बजे तक हमारी दिनचर्या बड़े रोचक ढंग से व्यतीत होती है। मैं रोज रात को स्टार प्लस के कार्यक्रम देखती हूँ। हमारे साथी हमें साइन लेंग्वेज से समझाते रहते है।होस्टल में एक दूसरे से बात करते हुए हम बहुत एन्जॉय करते है।"
"पूनम पन्ना से यहाँ आई और 12th कॉमर्स की पढ़ाई कर रही है। उषा मैडम जितने प्यार भरे तरीके से सब सही गलत बाते समझाती है उससे बहुत प्रभावित है।वो बताती है , मैं जब 2004 में यहाँ आई थी तब साइन लेंग्वेज नहीं जानती थी पर तीन महीनै में सीख गयी।यही से ग्रेजुएशन करुँगी।आपके स्काउट ग्रुप के सब गेम्स मुझे बहुत अच्छे लगे।मैं तो हर गेम 2-2 बार खेल रही हूँ।"
"पूनम के ही सहपाठी शंकरलाल बैतूल से पिछले वर्ष ही यहाँ आये है । बोलते है यहां बहुत कुछ नया सीखने को मिल रहा है। आज के बाल मेले में इलेक्ट्रॉनिक गेम और बॉल वाले गेम्स खेलकर मज़ा आ गया।"
"उमा जो शाजापुर की रहने वाली है 2005 से यहाँ है 12th कॉमर्स कर रही है।चहकते हुए कहती है बहुत अच्छा है बाल मेला। जोकर के मुह में बाल डालना, मटकी फोड़, कार वाला गेम, बाउलिंग ऐली, सिक्को और बटन वाला खेल सब कुछ कितना मजेदार है। आप सबका थैंक यूं।"
यह संस्थान 1974 से चल रहा है।आज के इस बाल मेले में इस संस्थान के कई भूतपूर्व छात्र भी मौजूद थे।
"इलाहाबाद के महेश 2010 से 2016 तक यहाँ पड़े बी. काम. किया। बोले कि यहाँ मेरा बहुत डेवलपमेंट हुआ। अब मैं इंदौर में ही लेमन ट्री होटल पलासिया में जॉब कर रहा हूँ। मैं भी बाल मेले का पूरा आनंद ले रहा हूँ। हमारा यह स्कूल इतना अच्छा है कि भारत सरकार ने भी पाकिस्तान से आई गीता को रखने के लिए सारे भारत वर्ष में से इस स्कूल को चुना। मुझे गर्व है कि मैं इस स्कूल का छात्र रहा हूँ।"
शुक्रिया प्यारे बच्चों हमारा आज का दिन सार्थक बनाने के लिए। अगले वर्ष हम फिर मिलेंगे।