अपनी धरोहर को बचाए

ग्राम खेरिया में स्थित एक प्राचीन सीढ़ीदार कुएँ की अत्यंत जर्जर एवं गंदगी से घिरी हुई स्थिति को देखकर मुझे इस परियोजना को शुरू करने की प्रेरणा मिली। यह कुआँ आज भी अनेक ग्रामीणों के लिए पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन इसके आसपास फैली गंदगी और क्षतिग्रस्त संरचना लोगों के स्वास्थ्य एवं इस ऐतिहासिक धरोहर दोनों के लिए चिंता का विषय थी।
सबसे पहले हमने अपने साथियों की एक बैठक आयोजित की, जिसमें प्राचीन सीढ़ीदार कुएँ की सफाई एवं संरक्षण के लिए विस्तृत रणनीति बनाई गई। बैठक में सभी सदस्यों से इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ने का आग्रह किया गया। इसके बाद आवश्यक औजारों एवं संसाधनों की व्यवस्था की गई और एक सप्ताह तक प्रतिदिन 2 घंटे श्रमदान करने की कार्ययोजना तैयार की गई।
इस परियोजना के दौरान हमें यह अनुभव हुआ कि जब लोग एक साझा उद्देश्य के लिए मिलकर कार्य करते हैं, तो सकारात्मक परिवर्तन लाना संभव हो जाता है। योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना, टीम के साथ समन्वय बनाए रखना और नियमित श्रमदान करना किसी भी सामाजिक अभियान की सफलता की कुंजी है। हमें यह भी सीख मिली कि प्राचीन धरोहरों और जल स्रोतों का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जनजागरूकता और सामुदायिक सहभागिता से स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में सकारात्मक सोच विकसित की जा सकती है।
Started Ended
Number of participants
10
Service hours
20
Beneficiaries
300
Location
India
Topics
Healthy Planet
Nature and Biodiversity
Leadership

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