शाबाश प्रेस्टीज स्कूल के मेरे प्यारे स्काउट गाइड बच्चों शाबाश
स्कूल से बच्चे बस में घर लौट रहे थे।एक बच्चा जब बहुत ही ज्यादा बस में मस्ती करने लगा तो बस के कंडक्टर भैया ने उसे टोक दिया। फिर भी बच्चे की शैतानी नहीं रुकी तो कंडक्टर भैया ने उस बच्चे को डांट दिया। डांट सुनकर बच्चा बोला कंडक्टर भैया आप हमें कुछ बोल नहीं सकते, हमारे पापा के पैसो से आपको सेलेरी मिलती है। कंडक्टर भैया की आँखों में आंसू आ गए। अगले दिन बस के इस वाकये की खबर प्रिंसिपल सर को लगी तो उन्होंने बच्चे और बच्चे के पेरेंट्स को बुलाकर, उन्हें समझाकर कंडक्टर भैया के समक्ष बच्चे से sorry बुलवायी।
वो प्रिंसिपल सर मेरे मित्र है। उन्होंने जब यह वाकया मुझे बताया तो वो भी बड़े दुखी थे।उनका कहना था पैसो को सब कुछ मानने वाले आज अधिकांश लोग रिश्तों की परवाह ही नहीं कर रहे। यह गलत हो रहा है। हम तो स्कूल में यह तो नहीं सीखाते।और इस वातावरण में पलने वाले बच्चे आगे क्या करेंगे पता नहीं।
यह घटना एक टीस के रूप में मुझे अक्सर याद आती थी।
मुझे मौका मिला एक दुसरे स्कूल प्रेस्टीज स्कूल में स्काउटिंग प्रशिक्षण का। पेट्रोल लीडर्स को प्रशिक्षण देते वक्त मैंने प्रस्ताव रखा बाल मेले का। बच्चे खुश थे। मैंने फिर कहा हम एक काम और करेंगे कि इस बाल मेले को हम आयोजित करेंगे अपने स्कूल के बस ड्राइवर और कंडक्टर भैया लोगों के लिए। एक स्काउट पेट्रोल लीडर बोला कुणाल सर जो हमारे स्कूल में दीदी लोग है जो चाय पानी और भोजन में मदद करती है उन्हें भी खेल खिलाएंगे। प्रेस्टीज स्कूल के प्रिंसिपल श्री प्रकाश चौधरीजी सर के प्रोत्साहन से टीचर नेहा मैडम, धाकड़ मैडम और वर्षा मैडम ने हर पेट्रोल के साथ कोआर्डिनेट कर बाल मेले की परिकल्पना को मूर्त रूप प्रदान कर दिया।
आज जब बाल मेले में मैं शामिल हुआ तो नन्हें मुन्ने स्काउट गाइड की मेहनत, उत्साह और ऊर्जा से मैं अभिभूत था। स्काउट गाइड बड़े प्रेम से बड़े आग्रह के साथ अपने अपने गेम्स बस ड्राइवर और कंडक्टर भैया एवं दीदियों को खिला रहे थे।
कितने खुश थे दोनों पक्ष। बड़े भी थोड़े शुरूआती संकोच के बाद बच्चों में घुल मिल गए। अद्भुत वातावरण था।
मैंने कुछ भैया लोगों से बातचीत की।सब बहुत प्रसन्न थे। कुछ तो बड़े भावविहल थे। बोले पहली बार बच्चों से इतनी बात हुई इतना प्रेम मिला। हमने सब गेम्स खेले । दीदी लोग भी बड़ी गदगद थी।बोली हमें यकीन ही नहीं हो रहा कि बच्चे ये बालमेला सिर्फ हमारे लिए कर रहे है। एक ड्राइवर भैया बोले मैंने 4-5 स्कूलों की बसे चलाई पर ऐसा मेलजोल पहली बार हुआ। बड़े अच्छे और प्यारे है इस स्कूल के बच्चे।
भरोसा करना होगा हमें आने वाली पीड़ी पर । वह भी उतनी ही अच्छी है जितने हम या हमारे पूर्वज थे। जरुरत है तो बस ऐसा वातावरण उपलब्ध कराने कि जो इन बच्चों को सच्ची ख़ुशी के मायने प्रस्तुत कर सके। यही सीखा मैंने इस प्रकरण से।
साधुवाद बच्चों, धन्यवाद चौधरी सर और नेहा, धाकड़ व वर्षा मैडम एवं आपकी पूरी टीम को इतना प्यार भरा मेला सफलता पूर्वक आयोजित करने के लिए।