मेरा पह्ला प्लस पोलियो अभियान

प्लस पोलियो अभियान ओर मेरे सेवा का पहला दिन ..उगते सूरज के साथ आंखों में नींद ओर समय पर राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड मंडल मुख्यालय बीकानेर द्वारा लगाये गए स्थान पर पहुचना ओर नही पहुंचने पर कड़क co मेम की डांट को याद करना
इसी के साथ शुरू होता है पहला दिन 
अपनी रोजाना की हवाई जहाज(मोटरसाइकिल) पर बैठ कर सीधे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुक्ता प्रशाद दोस्तो के साथ पहुंचना 
जहाँ स्काउट के सभी रोवर्स ओर रेंजर्स के साथ साथ कुछ नए चेहरे जो प्लस पोलियो अभियान में अपनी भूमिका निभाने के लिए वहाँ इक्कठा हुवे सभी के सभी अपने अपने ग्रुप में एक दूसरे से "अपनी रोजमर्रा की बाते कर रहे है" लेकिन सभी उत्साहित ।।
तभी केंद्र में से एक सिस्टर (जो वहां कंपाउंडर का काम करते है) आवाज आती है जिनका नाम संतोष था बड़ी ही हंसमुख ओर प्यारी मेंम ।।
सभी रोवर्स ओर रेंजर्स को अलग अलग बूथ मिले और फिर आती है हमारी बारी - हमारी टीम में हम 8 रोवर्स थे जिनकी ड्यूटी मोबाइल टीम में लगी ।।
पहले तो हम सभी रोवर्स ने यह सोचा कि मोबाईल टीम का मतलब ये होता है कि यदि किसी बूथ पर वैक्सीन समाप्त हो जाती है तो वह बूथ इंचार्ज हमे कॉल करेगा और हमे वहां वेक्सीन पहुंचानी है 
लेकिन फिर आया ऐसा मोड़ जिसमे हमे पता चला कि मोबाइल टीम का अर्थ है कच्ची बस्तियों में घर घर जाकर प्लस पोलियो की दवा पिलाना ओर उन्हें जागरूक करना ।।
पहले तो सभी के चेहरे जो पहले खिल रहे थे एक तरह मायूश हो गए।। क्यों कि ये काम उन्हें मुश्किल लग रहा था 
बाद में शुरुआत होती है अभियान की।। 
जिसमे मेरे साथ सीताराम मूँड़,गिरधारी ,विकाश सेवग, अंकुश बाना, अशोक गोदारा ,मोहित चारण,शेर बहादुर सिंह, ओर मेडिकल स्टाफ के 2 सबसे मिल जुलकर रहने वाले kailash जी और दूसरे साथी जिनका नाम हमने पूछा नही।।
फिर चलते है अपनी वैक्सीन लेकर कच्ची झुग्गी झोपड़ियों में जहाँ कुछ बच्चे हमे देखकर भागते ओर चिल्लाते पुलिस आ गयी पुलिस आ गयी भागो भागो।।
बड़ा ही प्यारा दृश्य ।।। कुछ छोटे बच्चे जो बिना कपड़ों में ही भाग रहे थे इन सभी दृश्य से हमे अपना बचपन याद आ गया ।।
बच्चो को वेक्सीन पिलाने से पहले हमने उनके परिवार को प्लस पोलियो पिलाने की सलाह दी इस रोग से होने वाले हानियों के बारे में बताया तथा छोटे बच्चो को वैक्सीन पिलाने की सलाह दी
पहली प्लस पोलियो की दवा मेने एक 4 साल के नन्हे बच्चे को पिलाई जो पहले बहुत रो रहा था लेकिन पोलियो की दवा पिलाने के बाद जब उसके बाया हाथ की चिट्ली पर मार्कर द्वारा निसान लगाया गया तो वह नन्हा बालक बड़ा ही उत्साहित हुआ जिसे देख मेरे मन को बहुत आनंद प्राप्त हुवा जिसकी मैने छायाचित्र भी लिया और अपने ग्रुप में भी शेयर की 
उस पल के बाद मेरी पूरी मोबाइल टीम बड़े उत्साह और जोश के साथ काम करने लग गयी हमने पूरे दिन में ऐसे कई पल अपने मोबाइल में कैद किये और अपने ग्रुप मेम्बर को भी शेयर किए 
हाँ इस कार्य मे अहम भूमिका co मेम की भी रही है जो हमे बार बार इस पोलियो कैम्प में समाज में किस प्रकार अच्छी पहल कर सके उसके लिए समय समय पर मोटिवेट कर रहे थे 
हमने सुबह 8 बजे से लेकर 4 बजे तक अपनी पूरी ड्यूटी की ओर डोर टू डोर छोटे बच्चो को पोलियो की दवा पिलाने का प्रयास किया हमने पहले दिन पूरी टीम ने 420 छोटे बच्चो को पोलियो की दवा पिलाई ।।
इतने बच्चो को पोलियो की दवा पिलाने के बाद जो थकान हुई सभी साथी अपने मुँह लटकाकर बैठ गए लेकिन उनके जोश को कायम रखने के लिए मेने हंशी मजाक के टॉपिक को छेड़ा तो सभी उसी रुत्त में जैसे वह सब सुबह दिख रहे थे उसी तरह हंसने खिलने लगे और कुछ पल जो थकान को भी मिटा दे ऐसे पल हमने अपने कैमरे में भी कैद किए
मेने ये सब अपने मंडल मुख्यालय बीकानेर के ग्रुप में भी शेयर किया जिसकी प्रसंशा सभी ने की ।
इसी बीच एक छोटी सी घटना हमारे साथ घटी वो थी एक कच्ची बस्ती में एक घर मे सो रही बूढ़ी माता राम जिसके गेट को हमने अचानक से बजाया ओर साथी विकास की मोटी आवाज होने के कारण सो रही बूढ़ी माता जी उठ कर भागने लगी सायद वह डर गए ओर जोर जोर से चिल्लाने लगे तभी दूसरे साथी ने उनसे पूछा माता जी क्या हुआ तो माता ने लट्ठ उठाया और कहा आओ पिलाती हु तुम सबको पोलियो ।। हमारे सभी साथी इस दृश्य को देख इधर उधर भागने लगे ये पल जब एक दूसरे के साथ हम सभी ने शेयर किया तो सब बहुत हँसे ।।।
दूसरे दिन भी हमने यही कार्य करते हुवे 400 से अधिक बच्चो को पोलियो पिलाया।।
मेरे सेवा का तीसरा दिन 
 दिन की शुरुवात ओर नई ऊर्जा और जोश वही सेवा भावना के साथ मै मेरी पूरी टीम निकल पडे छोटी छोटी झुग्गी झोपड़ीयो ओर औद्योगिक क्षेत्र में ।। 
वहां बच्चे हमे देख कर भागते ओर जोर से चिल्लाते कोई कहता पुलिस आ गयी और कोई बोलता सुई लगाने वाले आ गए ओर उनके परिवार जन भी जो शिक्षित न होने के कारण भी उनकी मानसिकता यह रहती ये पता नही हमारे बच्चे को क्या पिला देंगे लेकिन हमारे साथ के सभी रोवर्स ने उन सभी बच्चो के परिवार जन पोलियो की दवा के बारे में बताया और सतुष्ट किया और बच्चो को पोलियो की दवा पिलाई ।।
दवा पिलाने के बाद वहां के बच्चो का नाच कर अपनी खुसी जाहिर करना दिल को सुकून पहुंचाने वाला पल था पूरे दिन के दौर में हमने बड़े उत्साह भरे जोश के साथ अपने कार्य को पूरा किया
इस पूरे अभियान को हमारे मण्डल मुख्यालय के CO सर ने हम सबकी कार्यशैली को देखते हुवे इस अभियान को छापा मार अभियान नाम दिया 
मैं सर्वप्रथम राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड मंडल मुख्यालय बीकानेर का आभार व्यक्त करता हूं कि क्योंकि स्काउट गाइड की वजह से मुझे समाज सेवा करने का मौका मिला इसके द्वारा हमने पल्स पोलियो अभियान के तहत 1 दिन से 5 वर्ष तक के बच्चों बच्चों को पोलियो की दवाई पिलाकर हमने समाज सेवा की भारत में लगभग पोलियो खत्म हो चुका है देशों में अभी भी पोलियो की स्थिति है जिसके कारण अतः हम भारत को पूर्णता पोलियो मुक्त करना चाहते हैं ताकि भविष्य में कोई भी बच्चा पोलियो से ग्रसित नाहो ।
आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं वे तकनीकी विकास अत्यधिक तेजी से हो रहा है अत्यधिक शिक्षा में विकास हो रहा है और भारत में आज भी बहुत लोग ऐसे हैं जो शिक्षा का पूर्ण विकास उनके अंदर नहीं हो पाए जिसके कारण में पूरी दवाई से वंचित रह जाते हैं तथा अपने बच्चों को भी दवाई नहीं पीने देते हैं ... अतः हमारी सरकार से यह याचना है छोटे से छोटे स्थान पर शिक्षा का विकास किया जाए ।
अतः में पल्स पोलियो अभियान के तहत समाज सेवा का अति उत्तम मौका मिला भारत के सभी युवा एकजुट होकरऐसे अभियान चलाएं या ऐसे अभियानों का हिस्सा बनकर उसका पूर्ण सहयोग करेंगोलू जैसी बीमारियां व अन्य कई बीमारियों की जड़ से खत्म हो जाएगी।
इस अभियान के तहत हमने देखा कि लोग छोटे से छोटे गाजेट के द्वारा अपना जीवन यापन करते हैं ।
यह जानकारी प्राप्त की की पोलियो की वैक्सीन केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन (who) द्वारा सभी देशों को प्रदान की जाती है।
अबे मोबाइल टीम का सदस्य बनाया गया और हमने अपने कार्य को पूर्ण  सफल किया और इससे बच्चों के प्रति हमारा प्रेम बड़ा ।
हमें चिकित्सा क्षेत्र में जानकारी प्राप्त हुई। इस अभियान से प्रेरणा लेते हुए भविष्य में जितने भी समाजसेवी अभियान होंगे उनमें उनमें हम पूर्ण दे अपना सहयोग देंगेऔर ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसमें जुड़ने की प्रेरणा देंगे। और इस अभियान में हमारा यह ध्येय वाक्य था की दो बूंद जिंदगी की जो हमने बच्चों को सिखाई।
अभियान से हमें यह प्रेरणा मिली कि समाज सेवा ही सर्वोपरि धर्म है। इसमें मेरी टीम ने मेरा पूर्ण सहयोग किया। तथा अपने समिति ब्रेक भी लिया।
(मैं कृष्ण कुमार गोदारा अपनी टीम के साथ सभी अभियानों में भाग लूंगा)
 

Started Ended
Number of participants
8
Service hours
144
Location
India
Topics
Youth Programme
Youth Engagement
Legacy BWF
Partnerships
Good Governance

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