मिशन अली
ये है अली
जो गोरखपुर स्टेशन पे भीख माँगता और कूड़ा बीनता था।।
पिता का साया बचपन में ही उठ गया। माँ कूड़ा बीनती है।।।
दोनोँ नशे में भयंकर उलझे।।
इसे स्माइल रोटी बैंक टीम ने जब देखा कूड़ा उठाते
तो इस अक्षम मासूम को
अपने पास बिठाया
रोटी खिलाई
और फिर नहलाया
और स्माइल काउंसलिंग करके
उसे रास्ता दिखाया
स्माइल स्कूल का
हाँ आज स्माइल स्कूल सड़क पे जरूर चल रहा है
पर आज वहीं लिखी जा रही
सफलतम उर्जात्मक परिवर्तन की इबारत।।।
शायद अगर सन्साधन होते
कुछ बड़ी बात होती
बेंच होते
किताब होती
बस्ते होते
और इन सबके लिए आकर्षण को होती
रोटी
तो फिर जो इबारत आपकी स्माइल टीम लिखती
शायद भारत के नवनिर्माण में मील का पत्थर शाबित होगा....
हमे नही पता की क्या सही कीअ गलत
हम तो लगे हैं अक्षम मासूमों को स्माइल देने में।।
आज़ाद पाण्डेय
चीफ कैम्पेनर "स्माइल रोटी बैंक"